ओशो

प्रेम की तरलता हमें पागलपन ही मालूम हो सकती है

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प्रेम की तरलता हमें पागलपन ही मालूम हो सकती है

मैंने सुना है, एक कवि था,
*रिल्के*। जिन लोगों ने रिल्के को *कपड़े भी पहनते* देखा है 
वे कहते थे कि हम हैरान हो जाते थे।

जिन लोगों ने उसे *खाना खाते* देखा है वे कहते थे हम हैरान हो जाते हैं।

जिन लोगों ने रिल्के को *जूते पहनते* देखा है वे कहते थे वह
अदभुत थी घटना—यह देखना कि वह कैसे जूते पहन रहा है!
वह तो ऐसे जूते पहनता था जैसे जूते भी जीवित हों, *वह तो उनके साथ ऐसे व्यवहार करता था जैसे वे मित्र हों।* Read : प्रेम की तरलता हमें पागलपन ही मालूम हो सकती है about प्रेम की तरलता हमें पागलपन ही मालूम हो सकती है

निर्विचार का सौंदर्य

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निर्विचार का सौंदर्य

झेन फकीर हुआ: तोझान ओसो! वह बड़ा बहुमूल्य फकीर था! कहते हैं जब तोझान ओसो समाधि को हुआ, परमज्ञान को उपलब्ध हुआ, निर्वाण पा लिया उसने, खो गया सब भांति, बचा वही जो सदा है--तो कहते हैं, देवलोक में देवता आतुर हुए तोझान को देखने को--होना ही चाहिए। क्योंकि 
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पंडित-पुरोहित तुम्हें सिखाते हैं, विश्वास करो!

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पंडित-पुरोहित तुम्हें सिखाते हैं, विश्वास करो!

क्योंकि तुम अंधे रहो, यह उनके हित में है; तुम बहरे रहो, यह उनके हित में है; तुम सोए रहो, यह उनके हित में है। तुम जाग जाओ, यह खतरनाक है। क्योंकि जैसे ही तुम जागे, पंडित-पुरोहित की जरूरत न रही। जैसे ही तुम जागे, परमात्मा और तुम्हारे बीच किसी की जरूरत न रही -- न किसी दलाल की, न किसी मध्यस्थ की।
दलाल और मध्यस्थ तभी तक जरूरी हैं जब तक तुम सोए हो, अंधे हो, बहरे हो। पंडित-पुरोहित तुम्हारे बहरेपन पर, तुम्हारे अंधेपन पर जी रहे हैं। उनका सारा व्यवसाय तुम्हारी बंद आँखों पर टिका है। वे तुम्हें विश्वास देते हैं और श्रद्धा से बचाते हैं।
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हर एक दर्द को, नए अर्थ तक जाने दो! : अष्‍टावक्र

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हर एक दर्द को, नए अर्थ तक जाने दो! : अष्‍टावक्र

अभी दो—चार साल पहले इंग्लैंड में एक बहुत बड़ा मुकदमा चला। एक फार्मेसी ने, एक दवाइयों को बनाने वाले कारखाने ने एक दवा ईजाद की—शामक दवा, जो प्रसव की पीड़ा को दूर कर देती है। स्त्रियां उसे ले लें तो प्रसव की पीड़ा नहीं होती, बच्चा पैदा हो जाता है। लेकिन उसके बड़े घातक परिणाम हुए। बच्चे पैदा हुए—अपंग, अंधे, लंगड़े, लूले। सैकड़ों लोगों ने प्रयोग किया और अब सैकड़ों मुकदमे चल रहे हैं उस फार्मेसी पर, कि उन्होंने उनके बच्चों की हालत खराब कर दी। मां को तो पीड़ा नहीं हुई, लेकिन जिस जहर ने मां की पीड़ा छीन ली, उस जहर ने बच्चे को विकृत कर दिया। Read : हर एक दर्द को, नए अर्थ तक जाने दो! : अष्‍टावक्र about हर एक दर्द को, नए अर्थ तक जाने दो! : अष्‍टावक्र

बच्चों को रोने से न रोकें — ओशो

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बच्चों को रोने से न रोकें — ओशो

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि बच्चे के रोने की जो कला है, वह उसके तनाव से मुक्त होने की व्यवस्था है और बच्चे पर बहुत तनाव है। बच्चे को भूख लगी है और मां दूर है या काम में उलझी है। बच्चे को भी क्रोध आता है। और अगर बच्चा रो ले, तो उसका क्रोध बह जाता है और बच्चा हलका हो जाता है, लेकिन मां उसे रोने नहीं देगी।मनसविद्‍ कहते हैं कि उसे रोने देना; उसे प्रेम देना, लेकिन उसके रोने को रोकने की कोशिश मत करना। हम क्या करेंगे? Read : बच्चों को रोने से न रोकें — ओशो about बच्चों को रोने से न रोकें — ओशो

अज्ञानी से प्रशंसा पाकर भी क्या मिलेगा?

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अज्ञानी से प्रशंसा पाकर भी क्या मिलेगा?

अज्ञानी से प्रशंसा पाकर भी क्या मिलेगा? जिसे खुद ज्ञान नहीं मिल सका, उसकी प्रशंसा मांगकर तुम क्या करोगे? जो खुद भटक रहा है, उसके तुम नेता हो जाओगे? उसके सम्मान का कितना मूल्य है?

सुना है मैंने, एक सूफी फकीर हुआ; फरीद। वह जब बोलता था तो कभी लोग ताली बजाते थे तो वह रोने लगता। एक दिन उसके शिष्यों ने पूछा कि लोग ताली बजाते हैं तो तुम रोते किसलिए हो। तो फरीद ने कहा कि वे ताली बजाते हैं, तब मैं समझता हूं कि मुझसे कोई गलती हो गयी होगी। अन्यथा, वे ताली कभी न बजाते। ये इतने लोग! जब वे ताली नहीं बजाते, उनकी समझ में नहीं आता, तब मैं समझता हूं कि कुछ ठीक बात कह रहा हूं। Read : अज्ञानी से प्रशंसा पाकर भी क्या मिलेगा? about अज्ञानी से प्रशंसा पाकर भी क्या मिलेगा?

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